कल के सपने आज की हक़ीकत

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नमस्ते, मैं सुभाष;

आप सोच रहे होंगे कि कल तक तो इस तरह से आपसे मिलने कोई और आता था। अब आज ये नया कौन आया है?

तो आपको सही लग रहा है। कल तक कुछ यूं था:

“नमस्ते, मैं मोगली”

तो भाई कल का मोगली आज कहाँ गायब हो गया?

आज मोगली क्यों नही आया?

और ये सुभाष कौन है?

मोगली कहाँ गया?

ऐसे बहुत से सवाल आपके मन में उठ रहे होंगे। तो परेशान मत हो, मैं मोगली ही हूँ। आपका वही प्यारा, दुलारा मोगली।

तो फिर आज मैं खुद को सुभाष क्यों कह रहा हूँ? इसकी भी एक कहानी है।

आईये जाने क्या हुआ जो मोगली सुभाष हो गया।

पर पहले ज़रूरी काम। जो अभी भी मोगली से परिचित नही है और मोगली को नही जानते।

कृपा करके मुझसे इन जगहों पर मिले:

बच्चा होना बच्चों का खेल नही

मोगली की विद्यालय गाथा

युवा मोगली की जुदा ज़िन्दगी

अब आते है अपनी मुख्य बात पर। क्या हुआ जो कल का मोगली आज सुभाष हो गया।

वैसे हुआ तो बहुत कुछ पर सिर्फ मुख्य बातों पर रहते है। मोगली बड़ा हो गया। उसकी नौकरी लग गई। और शादी भी हो गई। मोगली के अब खुद के 2 छोटे मोगली है। अब आप ही सोचे शादी के कार्ड पर मोगली नाम पढ़ कर कोई आता। सबको लगता शादी या तो किसी सर्कस में है या जंगल में है।

तो उसकी वजह से अपना असली नाम ही लिखना पड़ा। मेरा नाम मेरे घरवालो ने आजादी के एक महानायक श्री सुभाषचंद्र बोस जी के नाम पर रखा था।

घर वालो को बड़ी उम्मीद थी कि उन सुभाष जी की तरह ये सुभाष भी क्रांति लाएगा और जीवन में कुछ बड़ा कर दिखायेगा। अब कुछ बड़ा किया जीवन में या नही ये तो नही पता पर हाँ क्रांतियां जरूर लाई बहुतों के जीवन में। ये तो आप सबको पता ही होगा अब तक।

क्रांति का सफर:

मेरे विचार और कार्य बचपन से ही क्रांतिकारी थे। और यही समा रहा यौवनकाल में भी। हर चीज़ को अलग ढंग से देखना। अलग तरह से समझना और समझाना।

खैर इन सबसे तो आप अब परिचित ही होंगे। बात करते है आज की।

आज मैं एक ज़िम्मेदार और नौकरीपेशा इंसान हूँ। ज़िम्मेदार इसलिए क्योंकि ज़िम्मेदारी आ गई। अब आ गई तो टालता कैसे। और अब मोगली बन के तो ज़िम्मेदारी नही उठाई जा सकती। इसलिए मोगली को सुभाष बनना पड़ा।

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कल के सपने:

सपने तो हर इंसान के होते है। और ज़िन्दगी भर रहते है। ज़िन्दगी के हर मोड़ पर सपने बदलते है। बचपन के सपने यौवनावस्था के सपनो से और यौवनावस्था के सपने आगे की ज़िन्दगी से बिल्कुल अलग होते है।

बचपन में बड़े सब काम करते थे और हम आराम। लगता था बच्चो की ज़िन्दगी कितनी कठिन है। बच्चा होना कितना कठिन है।

तब जल्द से जल्द बड़े होने की चाह थी।

थोड़ा बड़े हुए तो सपने बदले। नए सपनो ने ज़िन्दगी में दस्तक दी। ज़िन्दगी बदली और साथ लाई नई चुनौतियां।

उस समय बचपन सुहाना लगने लगा और आसान भी।

आज की हक़ीकत:

फिर आई ज़िम्मेदार बनने की घड़ी। घरवालों ने अपना नज़रिया ही बदल लिया। तो फिर हमे भी बदलना ही पड़ा।

ज़िम्मेदारी ने बहुत कुछ सिखाया और ज़िन्दगी ने भी।

जो बातें हमे तब अच्छी नही लगती थी जब हम बच्चे थे। वो आज हम खुद करने लगे। जिन बातों के लिए हम बचपन में डाट खाते थे आज उन्ही के लिए डाट रहे है।

समय और हालात दोनों बदल चुके है। और जीवन में बहुत बदलाव आये है।

जीवन के प्रमुख बदलाव:

परिवर्तन/बदलाव जीवन का सार है। आज जो चीज जैसी है कल वैसी नही रहेगी। कल जो है वो परसो वैसी नही रहेगी।

आरंभ होने से उसके अंत तक परिवर्तन सतत चलता रहता है। अब इतने लम्बे जीवन के हर परिवर्तन को याद रखना मुश्किल है। और उन सबकी बातें करना समय की कमी।

तो मुख्य और बड़े परिवर्तन पर रहते है।

बचपन में जो जीवन पढ़ाई और खेल के बीच उलझा था। समय के साथ वो स्कूल और कॉलेज में उलझ गया। दोस्तो में उलझ गया। प्यार और कैरियर में उलझ गया।

कल तक जो जीवन कैरियर में उलझा था आज नई ज़िन्दगी के आरंभ में उलझ गया।

और इन्ही सब उलझनों में कब बच्चे से युवा और युवा से बड़े हो गए पता ही नही चला।

कल की बात लगती है जब हम बच्चे थे। और आज दूसरे बच्चों को देख कर सब याद करते है।

खैर ये सब तो यादे है और जीवन का हिस्सा। परिवर्तन आये है, होते है और होते रहेंगे।

हमे चाहिए कि हम हर परिवर्तन के लिए तैयार रहे।

हर परिस्थिति का सामना करे और उसे अच्छे से समझे।

परिवर्तन से डरना नही चाहिए और सिर्फ भूतकाल में नही जीना चाहिए।

भविष्य हमे आवाज दे रहा है, हमे बुला रहा है।

तो मैं भविष्य देख कर आता हूँ और आपसे अगली बार मिलता हूँ।

अपनी इस जीवन अनुभव की अंतिम कड़ी ले कर।

तब तक के लिए, नमस्कार और धयन्वाद।

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