युवा मोगली की जुदा ज़िन्दगी

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नमस्ते, मैं मोगली;

वैसे तो आप सब मुझे अच्छे से जानते है। जो अभी भी नही जानते कृपा करके मुझसे यहाँ:

बच्चा होना बच्चों का खेल नही

और यहाँ

मोगली की विद्यालय गाथा

वर्तमान में मेरा जीवन नित नई परिस्थितियों और परेशानियों से गुजर रहा है। मेरा विद्यालय पूर्ण हुए वैसे तो ज्यादा समय नही बीता है लेकिन फिर भी काफी समय हो चुका है।

सच कहे तो मुझे याद भी नही कि कितना समय बीत गया। हाँ लेकिन इतना जरूर याद है कि विद्यालय खत्म होने के बाद जिस ज़िन्दगी के सपने थे। वो लगता है विद्यालय के साथ वहीं कहीं पीछे रह गई।

ज़िन्दगी में आये परिवर्तन:

विद्यालय से अब तक ज़िन्दगी बहुत तरीकों से और बहुत बार बदल चुकी है। सबके बारे में बात करना न तो मुझे याद है और न ही उतना समय।

जो सबसे बड़ा बदलाव आया विद्यालय के बाद से वो था कि,

पहले सब कहते थे :

“बस दसवीं पास कर लो फिर जो मन हो करना”

दसवीं के बाद नया राग शुरू हो गया :

“बच्चा बस आखरी 2 साल मेहनत कर लो फिर छुट्टी ही छुट्टी”

बड़ी हसरतों के साथ आने वाले जीवन के सुनहरे सपने ले कर 2 साल और लड़ते रहे। सोचने लगे कि बस 2 साल बाद दुनिया की उलट देगे। विद्यालय के बाद हम बड़े कहलायेंगे, आज़ादी अपनी मुट्ठी में होगी और दुनिया कदमों में।

जब विद्यालय खत्म हुआ तो उसकी बहुत ज्यादा खुशी थी। इतनी खुशी थी कि क्या चल रहा और क्या आने वाला है उसका कोई ध्यान ही नही। ज़िन्दगी मानो कुछ समय के लिए सपना थी।

सपने और हकीकत में अंतर:

पर ये स्वप्न जीवन ज्यादा न चला। जब आँख खुली तो देखा यार सच में दुनिया उलट गई। जो घर वाले अब तक बच्चा, बेटा कह कर बुलाते थे वो कहीं गायब ही हो गए।

उनकी हर बात सच निकली यार, सच में छुट्टी ही हो गई। छुट्टी ही हो गई फुर्सत के पलों की। छुट्टी ही हो गई आज़ादी की। छुट्टी ही गई दोस्तों की। और इन सब छुट्टियों से बड़ी यार छुट्टी ही हो गई ज़िन्दगी की।

जहाँ देखो वहाँ एक नया ही राग चल रहा है। जो कल तक 2 साल, बस 2 साल और का भजन गा रहे थे दिन भर। आज डॉक्टर, इंजीनियर और सरकारी नौकरी के रीमिक्स गा रहे है।

अरे देश की सरकार भी इतनी जल्दी वादे से नही पलटती जितनी जल्दी ये पलट गए। मुझे आज भी वो काले दिन याद है। बारहवीं का रिजल्ट भी नही आया था और घर में 4 कॉलेज के फॉर्म पहले से मेरा इंतज़ार कर रहे थे। बस इतना ही नही रिजल्ट वाले दिन का तो हाल ही निराला था।

सुबह का निकला मैं जब दोपहर बाद रिजल्ट देख कर आया तो किसी ने ये न पूछा कि कैसे हो?, सुबह से कुछ खाया? या कहाँ थे। सबसे पहला सवाल ये था कि बेटा IIT के सपने है या डॉक्टर के।

“खैर हमने न IIT जाना न डॉक्टर, न सरकारी नौकर, हमने करनी ज़िन्दगी एन्जॉय”।
@Shantanu
सपने सुहाने लड़कपन के:

नई आज़ादी, नई ज़िन्दगी, नए सपने और एक नई सोच ले कर पूरी रफ्तार से आगे बढ़े। रफ़्तार समय के साथ जोश के फलस्वरूप तेज़ी से और बढ़ी और साथ बढ़े हम। पर ज्यादा दूर चल न सके। जल्दी ही आज़ादी को भविष्य की बेड़ियों ने जकड़ लिया और हमारी रफ्तार हवा हो गई।

आज भले ही सर पर छत है। पेट भरा है। खाने, रहने, पहनने की कोई चिंता नही। लेकिन इन सब चिंताओं से बड़ी बहुत चिंताएं है।

युवाकाल की युवा चिंताएं:

– हमे खुद को सिद्ध करना है। घरवालो को, दुनिया को, जमाने को दिखाना है कि हम भी कुछ है।

– इस उम्र में खुद से ज्यादा चिंता तो दोस्तों की होती है। किसी जिगरी दोस्त को ज़रा सी दिक्कत हमारे दिल पर घाव कर जाती है।

– हर काम को करना है और अच्छे से करना है।

– भविष्य बनाने की कोशिश।

– हमेशा सबसे ऊपर और आगे रहने की चाह।

@shantanustyle
आज का आलम:

अब आज ये आलम है कि सोचते है जब भी बचपन की यादों को तो दिल खुश हो जाता है। जिस ज़िन्दगी को हमेशा बदलने की चाह थी आज वो ही दुबारा पाने की ख्वाहिश है।

पर गुज़रा ज़माना कभी लौटता नही ये याद रखना पड़ता है। आज के हालात भी कुछ ज्यादा अच्छे नही। जो मुश्किलें कल थी आज भी है बस उनका स्वरूप बदल गया है।

आज मुश्किल है कि प्यार पर ध्यान दे या करियर पर। दिल सम्भाले या भविष्य। पैसे कभी रहते नही और इक्षायें भगौना भर कर है। उन्हें पूरा करे तो कैसे? सपने राजशाही और हालात फ़कीरी।

इसी उधेड़बुन में जीवन व्यतीत हो रहा है।

किसी महान पुरुष ने कहा था:

“जवानी में पाप नही करेगे तो बुढ़ापे में गंगा में धोएंगे क्या? कच्छे”

उनकी इस बात पर सोचता हूँ कि लाओ हम भी पापी बन ही जाए। फिर ध्यान आता है यार पाप कहीं ज्यादा न हो जाए। जो सारा बुढापा सिर्फ धोने में ही निकल जाए। सोचो अगर सिर्फ धोते ही रहे तो सुखाएँगे कब? और समय पर सूखे नही तो गीले कैसे ले कर जायेगे।

सुना है गीले पापों के साथ स्वर्ग में प्रवेश नही है। कहते है गीले पापों से स्वर्ग का फर्श खराब हो जाएगा।

खैर वो तो तब ही पता चलेगा जब हम वहाँ जायेगे और अभी उसमें बहुत ज्यादा वक़्त है।

दिक्कतें एक नही हज़ार है:

अभी तो मुख्य दिक्कत ये है कि वो ज़िन्दगी कैसे जिये जिसके सपने स्कूल छोड़ने से पहले देखे थे।

अभी आज कल तो इन्ही सब उधेड़बुन में जीवन जा रहा है। आशा है समय निकलने से पहले इन सबका हल निकाल लेंगे।

चलिए अभी के लिए इतना ही बाकी मिलते है अगली बार। तब तक बस इतना याद रखिये कि पाप इतने भी न करे कि सारा बुढापा गंगा के किनारे ही निकल जाए।

 

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Shantanu is an Influencer, Fashion Designer, Model, Artist and a blogger.
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